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ये 10 आदत जो दिमाग को कमजोर बनाती है |  A buddhiest story on mental detox

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ये 10 आदत जो दिमाग को कमजोर बनाती है |  A buddhiest story on mental detox | gautam buddha

ये 10 आदत जो दिमाग को कमजोर बनाती है : एक गांव में रहने वाले एक युवक को अपने मन में अनियंत्रित विचारों से परेशानी हो रही थी वह चाहता नहीं था लेकिन कुछ विचार हमेशा उसके मन में चलते रहते थे किसी काम में जुटा रहने पर उसके हाथ पैर और शरीर काम कर रहे थे लेकिन उसका मन किसी बीती घटना में खोया रहता था उसने अपने भविष्य के बारे में वायु मंत्र में इरादे बनाने की आदत डाल रखी थी वह अक्सर सोचता था कि एक दिन मैं यह करूंगा मैं उसे करूंगा एक दिन मैं बहुत बड़ा और सफल व्यक्ति बन जाऊंगा उसके सपनों में वह हमेशा दूसरों से आगे रहता था और अपने आप को एक हीरो के रूप में प्रस्तुत करता था 

जब उसे कोई बुद्धिमान महान और साहसी आदमी की कहानी सुनने या पढ़ने का मौका मिलता था तो वह खुद को उस कहानी के नायक की जगह रख लेता था और उसके विचारों में उसी बहादुर और महान कार्यों को करने का प्रयास करता था लेकिन उसके विचारों में ही रहकर वह वास्तविकता में कोई कठिनाइयों का सामना नहीं करता था बीते सालों से ऐसा सोचते हुए उसे यह महसूस होने लगा कि उसने अपने मन की रची जाल में फंसा हुआ है जो उसे अपने विचारों में अपने सपनों के बारे में खुश रखता है 

लेकिन वास्तविक दुनिया में उसने उन सपनों को पूरा करने के लिए कभी कोई प्रयास नहीं किया एक दिन जब उसके दोस्त ने उससे कहा कि गांव में एक प्रसिद्ध बौद्ध सन्यासी आया है जो मन और मानसिक शांति संबंधित हर समस्या को आसानी से हल करता है तो उस युवक का मन खुश हो गया वह बौद्ध सन्यासी से मिलने गया और उसे अपनी समस्याओं के बारे में बताया बौद्ध सन्यासी ने ध्यानपूर्वक सभी शब्दों को सुना और फिर कहा तुम्हारी जीवन शैली में जो गलतियां हो रही हैं उनको बंद करने पर ही जीवन खुश और मानसिक शांति से भरा हो सकता है तुम कौन-कौन सी गलतियां कर रहे हो और अपने मन को कैसे साफ कर सकते हो आज मैं तुम्हें इसके बारे में विस्तार से बताऊंगा ध्यान से सुनो पहली गलती है 

पर्याप्त नींद नहीं मिलना पर्याप्त नींद नहीं मिलना शरीर और मन को कई तरीकों से हानि पहुंचाता है यदि तुम्हें पर्याप्त नींद नहीं मिलती तो तुम्हारी याददाश्त कमजोर हो जाती है तनाव चिड़ा पन हमेशा थका हुआ महसूस करना और चेहरे पर चमक की समस्याएं हो सकती हैं इसके अलावा कम नींद भी मस्तिष्क की क्षमता को प्रभावित करती है समस्याएं हल करने की ब्रेन की क्षमता पर असर करती हैं और तुलनात्मक अध्ययन करने में मस्तिष्क को कठिनाई होती है इसलिए हर दिन कम से कम पाच से छ घंटे गहरी नींद को बचाना महत्त्वपूर्ण है नींद हमारे जीवन में एक महत्त्वपूर्ण स्थान पर है 

क्योंकि यह हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने का माध्यम है प्रतिदिन गहरी नींद पाने से हमारी शारीरिक क्षमता बढ़ती है मानसिक तनाव कम होता है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है नींद हमारे दहिक और मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह हमारे शरीर को मरम्मत सफाई और इसकी ऊर्जा स्तर में सुधार करती है दैहिक स्वास्थ्य के पहलू में नींद की कमी आपकी शारीरिक क्षमता को कम कर सकती है क्योंकि नींद के दौरान हमारे शरीर की मरम्मत होती है साफ होती है और इसकी ऊर्जा स्तर में सुधार होता है 

आगे बढ़ने के लिए दैहिक स्वास्थ्य में नींद की कमी हमारी शारीरिक क्षमता को कम कर सकती है लगातार नींद की कमी से ही जीवन की गुणवत्ता बिगड़ती है 

बल्कि हमारे शरीर की इम्यून सिस्टम कमजोर होने लगती है जिससे रोग का खतरा बढ़ता है और मानसिक स्वास्थ्य के पहलू में नींद की कमी मानसिक तनाव और चिंता बढ़ा सकती है जिससे आपके दैहिक योजनाओं निर्णय लेने की क्षमता और उत्साह पर असर हो सकता है नींद की कमी बच्चों और युवाओं के शिक्षा कार्यों पर भी असर कर सकती है जिससे उनकी याददाश्त और नैतिकता प्रभावित हो सकती है जो उनके शिक्षामय को रोक सकता है इसके अलावा नींद की कमी आपके व्यक्तिगत जीवन में भी प्रभाव डाल सकती है जैसे कि आपकी ध्यान समर्पण और रिश्तों में समस्याएं आ सकती हैं संक्षेप में हमारे दैहिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में नींद का महत्त्वपूर्ण योगदान है 

 

आगे बढ़ने का दूसरा त्रुटि है भोजन की मात्रा और गुणवत्ता पर ध्यान नहीं देना और किसी भी समय कुछ भी खा लेना 

कुछ लोगों की आदत होती है कि वे जीवन में किसी सीमा को छोड़ना चाहते हैं यह नहीं समझते कि जीवन में कुछ बचता है क्या जीवन में क्या मजा है जीवन में कुछ बचता है क्या कुछ लोग हमेशा खाने की आदत में होते हैं यहां तक कि वे भूखे होते हैं फिर भी कुछ ना कुछ खाते रहते हैं ऐसे लोगों को लगता है कि अगर उन्होंने जीवन में भोजन की सीमा नहीं लगाई तो जीवन में कुछ बचता ही नहीं है क्या जीवन में कुछ करने का मजा नहीं है कुछ लोग बिना भूखे होते हैं फिर भी वे खाने की आदत में रहते हैं 

बिना भूखे होते हैं तो भी वे कुछ ना कुछ खाते हैं उन्हें यह लगता है कि यदि वे अपने जीवन में खाने की सीमा नहीं लगाएंगे तो उन्हें जीवन का कोई आनंद नहीं मिलेगा कुछ लोग सर्वदा खाते हैं चाहे उन्हें भूख लगी हो या नहीं वे कुछ भी खाने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं कहीं भी कभी भी कुछ भी खाने का ख्याल आता है उन्हें यह महसूस होता है कि जीवन में कुछ बचता ही नहीं है यदि वे खाने की सीमा नहीं लगाएंगे ऐसे लोग ना केवल अपने शारीरिक वजन में वृद्धि का सामना कर सकते हैं बल्कि इससे मानसिक शक्ति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है आटा तेल चीनी और अधिक नमक से बने खाद्य पदार्थों का सेवन शरीर के वजन में बढ़ोतरी को बढ़ावा देता है और कई बीमारियों की उत्पत्ति करता है 

इसके अलावा अनावश्यक भोजन का सेवन मानसिक शक्ति पर भी दुश्मनी पैदा कर सकता है क्योंकि एक बीमार शारीर व्यक्ति के मन को भी बीमार बना देता है जिससे व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार होता है और तनाव और चिंता का शिकार हो जाता है इसीलिए व्यक्ति को भोजन की उचित मात्रा और गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए 

 

तीसरी गलती है अत्यधिक दिनचर्या और यह मानना कि रुकना मना है 

कुछ लोग सोचते हैं कि जीवन ऐसा ही होता है हर हालत में जितना हो सके उतना दौड़ते रहना चाहिए गलत चाहे जीवन कितना ही दिनचर्या भरा हो लेकिन रुकना बहुत जरूरी है यदि आप हमेशा दौड़ते रहेंगे तो एक दिन आप घायल हो जाएंगे और उठने में आपको सांस फूलने में समस्या होगी इसलिए अपने जीवन की भगदड़ और चहल पहल के बीच में थोड़ा समय निकालें अपने आप को समय दें और देखें कि आपको कौन-कौन से काम में आनंद आता है आप किस काम में रमते हैं खुद से सवाल करें और खुद को जानने का प्रयास करें और देखें कि जब आप कुछ काम करते हैं तो आप अंदर से शांत और ताजगी महसूस कर रहे हैं तो बहुत जल्दी ही आप उसी काम में बहुत अच्छे परिणाम प्राप्त करने लगेंगे 

लेकिन यदि आप हमेशा दौड़ते रहेंगे तो आप थक जाएंगे आपको प्रत्येक काम को करने में अधिक समय लगेगा यह बहुत ऊर्जा लेता है फिर भी आप अंदर से खुश नहीं होंगे तो इतना ज्यादा दौड़ने की जरूरत नहीं है अच्छा काम के लिए आप में स्थिरता रखने का एक एहसास कराएं 

चौथी बात है अपनी बुरी आदत को पहचानना और उसे पूरी तरह से अपने जीवन से हटा देना 

प्रत्येक म नुष की कुछ ऐसी बुरी आदत होती है जो सबसे अधिक क्षति पहुंचाती है जो उसको आगे बढ़ने नहीं देती अब एक आदत कुछ भी हो सकती है जैसे कि काम को रोकने की आदत अधिक विचारशील की आदत चिंता या झगड़े करने की आदत जो भी आदत आपको सबसे ज्यादा क्षति पहुंचा रही है उसे पहचाने और आज से ही उसे सुधारने की कोशिश करें हालांकि आदतें बदलना इतना आसान नहीं है लेकिन यह सब कुछ बदल सकता है अगर आप में वह दृढ़ संकल्प और सहनशीलता है और यदि आप निरंतर प्रयास करते हैं तो यह आपकी नई आदत बन जाएगी और पुरानी आदत खुद चली जाएगी 

पांचवीं गलती जरूरत से ज्यादा वादे करना आपको वादा करना चाहिए और आपको अपने वादे पर दृढ़ रहना चाहिए 

जो लोग वादा करते हैं और उसे पूरा करते हैं उन्हें समाज में अलग ही सम्मान होती है लोग उन्हें अधिक पसंद करते हैं लेकिन हमें कभी भी उस वादे को नहीं करना चाहिए जो हम पूरा नहीं कर सकते या जिस पर हमें पूरा करने में संदेह हो इसके साथ ही हमें यह भी जानना चाहिए कि कैसे कहना है ना यह आवश्यक नहीं है कि हम उसे करें जो दूसरों ने किया है हमें हमेशा उनकी आंखों में अच्छा लगने की कोशिश करनी चाहिए हमें यह भी जानना चाहिए कि कैसे मना कहे किसी के सारे कामों को करने का प्रयास करने की आवश्यकता नहीं है हमें मना करने की भी जरूरत है केवल उतना करें जितना आप कर सकते हैं और जितना आपके लिए सहज हो फिर देखें जीवन में कितनी शांति आती है 

छठी गलती अपनी अंदर अपने आप को आलोचना करना और दूसरों के मुकाबले कमजोर महसूस करना 

अगर आपकी आदत है खुद की बुरी तरह बातें कहने की और हमेशा अपनी गलतियों की तलाश में है तो आपको इसे छोड़ देना चाहिए क्योंकि इससे आपने अपने जीवन को नर्क बना लिया है अगर आपने कोई गलती की है तो खुद से कहे कि यह अच्छा है कि मैंने यह गलती महसूस की है मैं वह व्यक्ति हूं जो अपनी गलतियों से सीखता है और आगे बढ़ता है ऐसा कहे कि आप उस गलती से कुछ सीख रहे हैं और आगे बढ़ रहे हैं क्योंकि अपने आप को बुरा बोलने से आपने खुद को उसी जंजीर में बंध लिया है फिर वह उसे तोड़ने में असमर्थ रहता है और मानसिक रूप से लड़ता और पीड़ा होता है तो यदि यह आप में है कि आप अपने बारे में बुरा बोलने की आदत है तो इसे जल्दी ही छोड़ दें क्योंकि इससे जीवन सुंदर होगा 

सातवां गलती बुरी यादों और पूर्व के नकारात्मक विचारों से मन को भरना बुरी यादों को बचाए रखना 

जो पूर्व में कुछ बुरा हुआ था उसके साथ बुरी यादें बनाए रखना यह सब आपको बहुत अधिक भारी बना देता है तो अपने मन और आत्मा को साफ करें अपने मन और ब्रेन को हर दिन साफ करें जैसा कि आपका शरीर हर दिन खुद को ठीक करता है जैसे ही आप सुबह उठते हैं आप अपने अंदर से सारी गंदगी को मूत्र और मल के माध्यम से बाहर निकाल देते हैं तो इसी तरह अपने मन से और अपने ब्रेन से सारी आंतरिक उतार चढ़ाव नफरत और शिकायतें हर रोज से दूर करें इसके साथ ही हर रात सोने से पहले अपने आत्मा और मन से सारी आंतरिक उतार चढ़ाव आपसी नफरत और शिकायतें दूर करें इसके साथ ही हर सुबह समय निकाले और ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास करें आपका जीवन बहुत खुशहाल हो जाएगा 

आठवीं गलती अवा स्तक आशाएं रखना आशाएं रखना मानव स्वभाव है 

लेकिन जब वास्तविकता से बाहर हो जाती हैं और अत्यधिक हो जाती हैं तो यह हमें हमेशा तना वित रखता है लोगों से लड़ता है और फिर हम अपने जीवन में असंतुष्ट हो जाते हैं लक्ष्य हासिल करने में रुकावटें होती हैं हम दूसरों से झगड़े करने लगते हैं और फिर हम अपने जीवन के सभी पहलुओं में नकारात्मक चीजें देखने लगते हैं हम अपने लक्ष्य को हासिल करने में असमर्थ महसूस करने लगते हैं जीवन में संतुष्टि प्राप्त करने में आपकी अपेक्षाएं हमेशा वास्तविक और उचित होनी चाहिए और हमेशा यह मानना चाहिए कि इन वास्तविक अपेक्षाओं के साथ कुछ ऊपर नीचे हो सकता है कभी-कभी चीजें हो जाएंगी नहीं लेकिन यह सामान्य है आज जो कुछ नहीं हुआ

वह कल हो सकता है जो कल नहीं हुआ वह परसों हो सकता है सवी गलती अपने स्वास्थ्य की अवधार देखभाल ना करना स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी धन और धार्मिक समृद्धि है लेकिन कई बार लोग इसे ध्यान नहीं देते और अपने जीवन में बिना आवधिक के अस्तित्व करते हैं यह सबसे बड़ी गलती हो सकती है क्योंकि अगर आप अच्छे स्वास्थ्य के साथ नहीं होंगे तो आप जीवन का आनंद नहीं ले सकते स्वस्थ रहने के लिए आपको नियमित रूप से व्यायाम करना सही खानपान का ध्यान रखना और पर्याप्त आराम लेना चाहिए इसके लिए आपको अपने दिनचर्या में समय निकालना होगा और स्वास्थ्य को पहचानना होगा कि यह कैसे आपकी जीवन शैली को प्रभावित करता है 

दसवीं गलती सफलता की मापदंडों की गलत ताक पर चढ़ना 

लोग अक्सर सफलता को केवल मापदंडों जैसे पैसा सम्मान या सामाजिक स्थिति के माध्यम से ही मानते हैं लेकिन सच्ची सफलता व्यक्ति के आत्मसमर्पण सृजनात्मकता और उद्दीपन में भी होती है अगर आप सिर्फ बाह्य मापदंडों के पीछे भाग रहे हैं तो आप अपने असली प्रयास को भूल सकते हैं और खुद को खो सकते हैं इसीलिए सफलता को सिर्फ बाह्य प्राप्ति से नहीं बल्कि आत्म समर्पण और व्यक्तिगत उन्नति के माध्यम से भी मापना चाहिए 

 

आखिरी गलती खुद को स्वीकृति नहीं करना आपको खुद को स्वीकार करना चाहिए अपनी सफलताओं का आनंद लेना चाहिए और खुद को प्यार करना चाहिए अपने अच्छे गुणों को पहचाने और उन्हें बढ़ावा दें लेकिन साथ ही अपनी कमजोरियों को भी स्वीकारें और उन पर काम करें खुद को स्वीकृति देना ही एक स्वस्थ और संतुलित जीवन का कुंजी है दोस्तों आपको यह कहानी कै लगा कमेंट करके जरूर बताए  

 

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