दिनभर Phone, Laptop चलाते हैं? Mental Fatigue और Stress से निपटने के 5 आसान तरीके जान लीजिए 

सुबह उठते ही फोन की स्क्रीन, दिन भर लैपटॉप के सामने बैठकर काम और फिर देर रात तक सोशल मीडिया पर स्क्रोलिंग। सुबह से शाम तक हम स्क्रीन से घिरे हुए हैं। बिना स्मार्टफोन और लैपटॉप के जिंदगी इमेजिन करना भी मुश्किल है। काम से लेकर एंटरटेनमेंट तक सब फोन या लैपटॉप पर है। लेकिन इन गैजेट्स का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल ना सिर्फ हमारे शरीर को थकाता है बल्कि दिमाग पर भी गहरा असर डालता है। नतीजा इनके ज्यादा यूज़ से डिजिटल ओवरलोड बढ़ता है। मानसिक थकान बढ़ती है और लगातार बढ़ता चला जाता है स्ट्रेस। कई बार जब घर में मम्मी पापा फोन कम इस्तेमाल करने के

लिए कहते हैं तो उनकी बात अच्छी तो नहीं लगती लेकिन कह तो वो सच ही रहे होते हैं। स्क्रीन से हमारा यह लगाव धीरे-धीरे हमारी मेंटल हेल्थ को नुकसान पहुंचा रहा है। अब सवाल है कि इस डिजिटल ओवरलोड से कैसे बचा जाए? कौन से छोटे लेकिन असरदार बदलाव हमारी मेंटल हेल्थ को बेहतर बना सकते हैं और ऐसे कौन से पांच लाइफस्टाइल चेंजेस हैं जिन्हें अपनाकर हम मेंटल स्ट्रेस को कम कर सकते हैं और अपने दिमाग को रिलैक्स कर सकते हैं इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए हमने बात की पद्मश्री सम्मानित पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजिस्ट और जेंडर के फाउंडर डॉक्टर संजीव बगाई से। डॉक्टर बगाई

कहते हैं कि डिजिटल ओवरलोड और बढ़ते मेंटल स्ट्रेस से बचने के लिए किसी बड़े चेंज की नहीं बल्कि हर रोज छोटी-छोटी आदतों में सुधार करने की जरूरत है। यह लाइफस्टाइल चेंजेस धीरे-धीरे मेंटल हेल्थ को बेहतर करेंगे और फिर स्ट्रेस कम करने में भी मदद करेंगे। सबसे पहला चेंज है कि सुबह की शुरुआत स्क्रीन से नहीं बल्कि माइंडफुल मॉर्निंग से करें। उठते ही मोबाइल देखने की बजाय कम से कम 20 से 30 मिनट तक फोन से दूर रहें। इसकी जगह एक गिलास पानी पिए। हल्की स्ट्रेचिंग, योग या छोटी सी वॉक करें। साथ ही सुबह 10 से 15 मिनट धूप में बिताने की आदत डालें। इससे मूड बेहतर होता

है और शरीर में फील गुड हॉर्मोंस का लेवल बढ़ता है। इसके अलावा हेल्दी ब्रेकफास्ट करें और ब्रेकफास्ट करते समय भी किसी स्क्रीन या ध्यान भटकाने वाली चीज से दूर रहें। दूसरा चेंज स्क्रीन टाइम को बेहतर तरीके से मैनेज करें। लगातार मोबाइल या लैपटॉप पर काम करने से मानसिक थकान बढ़ सकती है। इसीलिए हर 45 से 50 मिनट बाद कम से कम 5 मिनट का ब्रेक लें। इस दौरान थोड़ी देर टहलें, स्ट्रेचिंग करें या खिड़की से बाहर देखें। ताजी हवा लें। अपने डेस्क पर हमेशा पानी की बोतल रखें और खुद को हाइड्रेट करते रहें। चाहे तो यू आर नॉट अ कैक्टिस। प्लीज ड्रिंक वाटर वाला

रिमाइंडर भी लगा सकते हैं। तीसरा बदलाव डीप ब्रीथिंग और मेडिटेशन को अपने रूटीन का हिस्सा बना लें। दिन में दो बार सिर्फ 5 मिनट गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज या मेडिटेशन करने से स्ट्रेस हॉर्मोन कॉर्टिसॉल का लेवल कम हो सकता है और मन को शांति मिलती है। हैशटग मैनिफेस्टिंग पीस। चौथा बदलाव पूरी नींद लें। अच्छी और पूरी नींद मेंटल हेल्थ के लिए जरूरी है। सोने से 30 से 60 मिनट पहले फोन या लैपटॉप यूज़ ना करें। रील्स तो बिल्कुल भी ना देखें। अपने रूम की लाइट डम कर दें और कोशिश करें कि आप रोज एक ही टाइम पर सो जाएं। 7 से 9 घंटे की नींद दिमाग और शरीर दोनों की

रिकवरी में मदद करती है। पांचवा और आखिरी बदलाव है सोशली एक्टिव रहना। नाउ सोशल मीडिया पर नहीं रियल लाइफ में। अपनी फैमिली और फ्रेंड्स के साथ समय बिताइए। घर से दूर रहते हैं तो दोस्तों से मिलिए। आपके मन में क्या चल रहा है वो किसी से शेयर करते रहिए। इसके अलावा अपनी किसी क्रिएटिव हॉबी के लिए समय निकालिए। म्यूजिक, पेंटिंग, पोट्री, पोएट्री, योगा, किताब पढ़ना, गार्डनिंग करना, यू लेले बजाना। आपको जो भी अच्छा लगे वो करिए। यह सब आपको रिलैक्स करने के साथ-साथ स्ट्रेस कम करने में भी मदद करेंगे। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि डिजिटल लोड को कम कर मेंटल हेल्थ को बेहतर करने के लिए यह छोटे-छोटे चेंजेस कारगर साबित हो सकते हैं।

दिनभर फोन और लैपटॉप पर रहते हैं? मानसिक थकान और तनाव कम करने के 5 आसान उपाय

आज की डिजिटल दुनिया में सुबह आंख खुलते ही मोबाइल स्क्रीन सामने होती है और रात सोने से पहले तक भी हम किसी न किसी स्क्रीन से जुड़े रहते हैं। ऑफिस का काम हो, पढ़ाई हो या मनोरंजन, स्मार्टफोन और लैपटॉप हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन इन उपकरणों का अत्यधिक उपयोग धीरे-धीरे हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।

लगातार स्क्रीन देखने से दिमाग पर दबाव बढ़ता है, ध्यान भटकता है और मानसिक थकान महसूस होने लगती है। यही स्थिति आगे चलकर तनाव, चिड़चिड़ापन और भावनात्मक असंतुलन का कारण बन सकती है।

पद्मश्री सम्मानित पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजिस्ट और जेंडर के संस्थापक डॉ. संजीव बगाई के अनुसार, डिजिटल ओवरलोड से बचने के लिए किसी बड़े बदलाव की आवश्यकता नहीं है। रोजमर्रा की कुछ छोटी आदतों में सुधार करके मानसिक स्वास्थ्य को काफी बेहतर बनाया जा सकता है।

1. सुबह की शुरुआत मोबाइल से नहीं, खुद से करें

अधिकांश लोग जागते ही सबसे पहले फोन चेक करते हैं। यह आदत दिन की शुरुआत में ही दिमाग पर अतिरिक्त बोझ डाल देती है।

सुबह उठने के बाद कम से कम 20 से 30 मिनट तक मोबाइल से दूरी बनाए रखें। इस समय का उपयोग एक गिलास पानी पीने, हल्की स्ट्रेचिंग करने, योग करने या थोड़ी देर टहलने में करें। यदि संभव हो तो 10 से 15 मिनट धूप में भी बिताएं। इससे शरीर में सकारात्मक हार्मोन सक्रिय होते हैं और मूड बेहतर रहता है।

नाश्ता करते समय भी मोबाइल या टीवी से दूरी रखें और भोजन पर पूरा ध्यान दें।

2. स्क्रीन टाइम को समझदारी से नियंत्रित करें

घंटों तक लगातार स्क्रीन पर काम करने से दिमाग थकने लगता है। इसलिए हर 45 से 50 मिनट बाद कम से कम 5 मिनट का छोटा ब्रेक जरूर लें।

इस दौरान:

  • कुछ कदम चलें
  • शरीर को स्ट्रेच करें
  • खिड़की से बाहर देखें
  • गहरी सांस लें
  • ताजी हवा का आनंद लें

साथ ही पर्याप्त पानी पीते रहें। शरीर में पानी की कमी भी थकान और एकाग्रता में कमी का कारण बन सकती है।

3. डीप ब्रीदिंग और मेडिटेशन अपनाएं

मानसिक शांति पाने के लिए घंटों ध्यान लगाने की जरूरत नहीं होती। दिन में सिर्फ दो बार 5 मिनट गहरी सांस लेने का अभ्यास या मेडिटेशन करना भी काफी लाभदायक हो सकता है।

यह अभ्यास तनाव से जुड़े हार्मोन कॉर्टिसॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है और मन को शांत बनाता है। कुछ मिनटों का यह विराम पूरे दिन की मानसिक ऊर्जा को संतुलित रख सकता है।

4. भरपूर और गुणवत्तापूर्ण नींद लें

अच्छी नींद मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के लिए बेहद आवश्यक है।

सोने से कम से कम 30 से 60 मिनट पहले मोबाइल, लैपटॉप या अन्य स्क्रीन का उपयोग बंद कर दें। विशेष रूप से देर रात तक रील्स और शॉर्ट वीडियो देखने की आदत से बचें।

कमरे की रोशनी हल्की रखें और रोजाना लगभग एक ही समय पर सोने की कोशिश करें। 7 से 9 घंटे की अच्छी नींद दिमाग को पुनः ऊर्जा प्रदान करती है और तनाव को कम करने में मदद करती है।

5. सोशल मीडिया नहीं, वास्तविक रिश्तों से जुड़ें

ऑनलाइन कनेक्शन की तुलना में वास्तविक रिश्ते मानसिक स्वास्थ्य के लिए कहीं अधिक फायदेमंद होते हैं।

परिवार के साथ समय बिताएं, दोस्तों से मिलें और अपने मन की बातें किसी भरोसेमंद व्यक्ति से साझा करें। इसके अलावा किसी रचनात्मक शौक को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।

जैसे:

  • संगीत सुनना या सीखना
  • पेंटिंग करना
  • कविता लिखना
  • योग करना
  • किताबें पढ़ना
  • बागवानी करना
  • कोई वाद्य यंत्र बजाना

ये गतिविधियां मन को सुकून देती हैं और तनाव को स्वाभाविक रूप से कम करती हैं।

निष्कर्ष

डिजिटल उपकरण हमारी जरूरत बन चुके हैं, लेकिन उनका अत्यधिक उपयोग मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकता है। अच्छी बात यह है कि कुछ सरल और नियमित आदतों को अपनाकर डिजिटल ओवरलोड के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

सुबह की बेहतर शुरुआत, संतुलित स्क्रीन टाइम, नियमित मेडिटेशन, पर्याप्त नींद और मजबूत सामाजिक संबंध—ये पांच छोटे कदम मानसिक शांति और बेहतर जीवन की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

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